Wednesday, November 5, 2014

कब वो जाहिर होगा

(उसके लिए जो कभी कुछ नहीं कहती ☺)


कब वो जाहिर होगा और हैरान करेगा मुझे
सारी मुश्किलों से आजाद कर देगा मुझे
जान फुकेगा वो मुहब्बत के जिस्म में मेरे
अपने सामने बेजान कर देगा मुझे
एक नामौजूदगी रह जायेगी चारों तरफ
घीरे घीरे इस कदर सुनसान कर देगा मुझे
बिन कुछ कहे सब कह जायेगा
इस तरह बे पीर कर जायेगा मुझे
छूट जायेंगी उसकी यादों की चाकरी मुझसे
किसी दिन अफ़सर-ए-खास कर जायेगा मुझे
खिलेंगे तब मुहब्बत के फूल गुलशन में
देखते ही देखते वीरान कर जायेगा मुझे
पीर = आवाज़
चाकरी = नौकर जैसे काम करना
~~ अभिषेक तिवारी ‘अजेय’

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